<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-2645934286912353700</id><updated>2012-02-16T17:48:16.475-08:00</updated><title type='text'>युवा जोश</title><subtitle type='html'>चाहत! कुछ करने की</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://saddamhussainabd.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2645934286912353700/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://saddamhussainabd.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Arvind Gaurav</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/-7LZ1bBHj7P4/Tkvw9uNzsoI/AAAAAAAAAsc/Wa-8Z9dlAaA/s220/Arvind%2Bkumar%2BGaurav.JPG'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>1</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2645934286912353700.post-5581804735715143935</id><published>2008-10-12T04:05:00.000-07:00</published><updated>2008-10-12T04:34:55.213-07:00</updated><title type='text'>सद्दाम हुसैन</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_S-gIasDIFWo/SPHaj37-8dI/AAAAAAAAAD8/BwDjJm_VtgU/s1600-h/390px-Saddam_Hussein_at_trial,_July_2004.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5256222549963895250" style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 195px; CURSOR: hand; HEIGHT: 269px" height="281" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_S-gIasDIFWo/SPHaj37-8dI/AAAAAAAAAD8/BwDjJm_VtgU/s320/390px-Saddam_Hussein_at_trial%252C_July_2004.jpg" width="208" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;दो दशकों तक इराक़ के राष्ट्रपति रहे सद्दाम हुसैन का जन्म वर्ष 1937 के अप्रैल महीने में बग़दाद के उत्तर में स्थित तिकरित के एक गाँव में हुआ।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;वर्ष 1957 में युवा हुसैन ने बाथ पार्टी की सदस्यता ली जो अरब राष्ट्रवाद के एक समाजवादी रूप का अभियान चला रही थी.&lt;br /&gt;ब्रिटेन ने तत्कालीन राष्ट्रसंघ से अनुमति लेने के बाद 1920 से 1932 तक इराक़ पर शासन किया था और इसके बाद के वर्षों में भी इराक़ पर उनका राजनीतिक और सैनिक प्रभाव क़ायम रहा.&lt;br /&gt;स्वाभाविक तौर पर देश में पश्चिम के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त विरोध की भावना घर कर चुकी थी.&lt;br /&gt;आख़िरकार वर्ष 1962 में इराक़ में विद्रोह हुआ और ब्रिगेडियर अब्दुल करीम क़ासिम ने ब्रिटेन के समर्थन से चल रही राजशाही को हटाकर सत्ता अपने क़ब्ज़े में कर ली.&lt;br /&gt;क़ासिम सरकार के ख़िलाफ़ भी बग़ावत हुई और ब्रिगेडियर क़ासिम को मारने का प्रयास किया गया जो नाक़ाम रहा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;सद्दाम हुसैन भी इसमें शामिल थे और इस षडयंत्र के बाद उन्हें भागकर मिस्र में शरण लेनी पड़ी.&lt;br /&gt;लेकिन वो फिर लौटे वर्ष 1963 में, जब बाथ पार्टी ने विद्रोह के बाद सत्ता हासिल कर ली.&lt;br /&gt;कुछ ही महीनों में ब्रिगेडियर क़ासिम के सहयोगी कर्नल अब्द-अल-सलाम मोहम्मद आरिफ़ को बाथ पार्टी को गद्दी से हटाने में क़ामयाबी मिल गई.&lt;br /&gt;एक बार फिर सद्दाम हुसैन सींखचों के पीछे डाल दिए गए.&lt;br /&gt;फिर 1966 में वे जेल से भाग निकले और बाथ पार्टी के सहायक महासचिव बने.&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;सत्ता &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;1968 में फिर विद्रोह हुआ और इस बार 31 वर्षीय सद्दाम हुसैन ने जेनरल अहमद हसन अल बक्र के साथ मिलकर सत्ता पर क़ब्ज़ा किया.&lt;br /&gt;दोनों ही तकरित के थे, रिश्तेदार थे और जल्दी ही दोनों बाथ पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेता बन बैठे.&lt;br /&gt;जनरल अल बक्र के नेतृत्व में सद्दाम हुसैन ने कई ऐसे क़दम उठाए जिनसे पश्चिमी जगत के माथे पर शिकन पैदा हो गई.&lt;br /&gt;वर्ष 1972 में इराक़ ने तत्कालीन सोवियत संघ के साथ उस वक्त 15 वर्षों का सहयोग समझौता किया जब शीतयुद्ध अपनी चरम सीमा पर था.&lt;br /&gt;इराक़ ने अपनी उन तेल कंपनियों का भी राष्ट्रीयकरण कर दिया जो पश्चिमी देशों को तब तक काफ़ी सस्ती दरों पर तेल दे रही थीं.&lt;br /&gt;वर्ष 1973 में आया तेल संकट और उस वक़्त जो भी फ़ायदा हुआ उसका निवेश देश के उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य में किया गया.&lt;br /&gt;जल्दी ही जीवन स्तर के मामले में इराक़ का स्थान अरब जगत में सबसे ऊपर के देशों में माना जाने लगा.&lt;br /&gt;धीरे-धीरे सद्दाम हुसैन ने सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत की और अपने रिश्तेदारों तथा सहयोगियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करते चले गए।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;1978 में नया क़ानून बना और विपक्षी दलों की सदस्यता लेने का मतलब जान से हाथ धोना माना जाने लगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;माना जाता है कि अगले ही साल यानी 1979 में, सद्दाम हुसैन ने ख़राब स्वास्थ्य के नाम पर जनरल बक्र को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर कर दिया और ख़ुद देश के राष्ट्रपति बन बैठे.&lt;br /&gt;आरोप हैं कि सत्ता संभालते ही उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को मारना शुरू कर दिया.&lt;br /&gt;कुछ वर्ष पहले इस सिलसिले में एक बार किसी यूरोपीय पत्रकार ने सद्दाम हुसैन से पूछा कि इराक़ी सरकार के अपने विरोधियों को मारने की बात क्या सही है तो सद्दाम ने बिना विचलित हुए कहा था- "निश्चित रूप से."&lt;br /&gt;सद्दाम हुसैन के शब्द थे- "आप क्या अपेक्षा करते हैं? जब वे आपकी सत्ता का विरोध कर रहे हों?"&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;इराक़-ईरान विवाद &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;सद्दाम अपनेआप को अरब देशों का सबसे प्रभावशाली प्रमुख समझने लगे थे.&lt;br /&gt;उन्होंने वर्ष 1980 में नई इस्लामिक क्रांति के प्रभावों को कमज़ोर करने के लिए पश्चिमी ईरान की सीमाओं में अपनी सेना उतार दीं.&lt;br /&gt;इसके बाद आठ वर्षों तक चले युद्ध में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.&lt;br /&gt;इस दौरान जुलाई, 1982 में सद्दाम हुसैन ने अपने ऊपर हुए एक आत्मघाती हमले के बाद शिया बाहुल्य दुजैल गाँव में 148 लोगों की हत्या करवा दी थी.&lt;br /&gt;मानवाधिकार उल्लंघन के ऐसे कई मामलों के बावजूद अमरीका ने इन हमलों में सद्दाम का साथ दिया था.&lt;br /&gt;हालांकि ईरान के साथ वर्ष 1988 में युद्धविराम घोषित हो गया पर सद्दाम ने अपने प्रभुत्व को बनाए रखने लिए अपनी ताकत को बढ़ाने के कामों को और तेज़ कर दिया.&lt;br /&gt;उन्होंने लंबी दूरी की मिसाइलों, परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियारों को विकसित करने का काम शुरू कर दिया.&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;खाड़ी युद्ध &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध का इराक़ की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। इससे उबरने के लिए उन्हें तेल के दामों को बढ़ाने की ज़रूरत महसूस हुई.&lt;/div&gt;&lt;div&gt;अगस्त, 1990 में इराक़ ने कुवैत को तेल के दामों को नीचे गिराने के लिए दोषी करार दिया जिसके बाद एक और युद्ध की शुरुआत हो गई.&lt;br /&gt;इस दौरान अमरीका की ओर से इराक़ पर हुई बमबारी से इराक़ को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा.&lt;br /&gt;जनवरी, 1991 में इस संघर्ष ने तेज़ी पकड़ी और इराक़ी सेना को कुवैत से पीछे हटने के लिए विवश होना पड़ा. इस संघर्ष में हज़ारों इराक़ी सैनिक मारे गए और पकड़े गए.&lt;br /&gt;इराक़ के कई तेल के कुँओं में आग लगा दी गई जिसकी वजह से भारी आर्थिक और पारिस्थितिक नुकसान उठाना पड़ा.&lt;br /&gt;इराक़ पर अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के मार्च 2003 में हमले के बाद से अब तक बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएँ हो चुकी हैं. यहाँ पेश है सद्दाम हुसैन का शासन समाप्त होने के बाद कुछ महत्वपूर्ण पड़ावों का ब्यौरा.&lt;br /&gt;पर इसके बाद इराक़ की सामाजिक स्थितियाँ इतनी सामान्य नहीं रहीं और शिया समुदाय ने विद्रोह शुरू कर दिया.&lt;br /&gt;शियाओं के इस विद्रोह को समर्थन देने की जगह पश्चिमी देश इनकी अनदेखी करते रहे और उनका दमन चालू रहा.&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;सत्ता परिवर्तन &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;इराक़ पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से कई आर्थिक प्रतिबंध लगे जिसकी वजह से इराक़ की अर्थव्यवस्था चरमराने लगी.&lt;br /&gt;वर्ष 2000 में अमरीका में जॉर्ज बुश की ताजपोशी ने सद्दाम सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसके बाद अमरीका साथ तौर पर सत्ता परिवर्तन की बात कहने लगा. वर्ष 2002 में संयुक्त राष्ट्र के दल ने इराक़ का दौरा किया. इस दौरान इराक़ ने कई मिसाइलों को ख़त्म किया पर बुश की शंका कम नहीं हुई.&lt;br /&gt;मार्च 2003 में अमरीका ने अपने कुछ सहयोगी देशों के साथ इराक़ पर हमला कर दिया. 09 अप्रैल 2003 को सद्दाम हुसैन की सरकार को गिरा दिया गया.&lt;br /&gt;अमरीकी सेनाएँ राजधानी बग़दाद के केंद्रीय इलाक़ों की तरफ़ बढ़ती हैं जिसके बाद सद्दाम हुसैन सरकार का नियंत्रण राजधानी के ज़्यादातर इलाक़ों से ख़त्म हो जाता है.&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt; &lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_S-gIasDIFWo/SPHbeo6upLI/AAAAAAAAAEE/nBRDYjMaClQ/s1600-h/20040701152847saddam203index.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5256223559544382642" style="WIDTH: 188px; CURSOR: hand; HEIGHT: 142px" height="177" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_S-gIasDIFWo/SPHbeo6upLI/AAAAAAAAAEE/nBRDYjMaClQ/s320/20040701152847saddam203index.jpg" width="203" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;       सद्दाम&lt;/span&gt; हुसैन की एक मूर्ति को जब अमरीकी सैनिक तोड़ते हैं तो वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने मूर्ति पर अपना ग़ुस्सा उतारा. अमरीकी सैनिकों ने इसे एक प्रतीकात्मक घटना बताया.&lt;br /&gt;इसके बाद 13 दिसंबर, 2003 को सद्दाम हुसैन को पकड़ लिया गया. सद्दाम हुसैन को अमरीकी सैनिकों ने पकड़ा. वह तिकरित शहर के एक घर में छुपे हुए पाए गए और उन्होंने बिना किसी लड़ाई के ही समर्पण कर दिया।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;  इसके बाद से उनपर कई मामलों में मुक़दमा चलाया गया. दुजैल नरसंहार के अभियुक्त के रूप में सुनवाई के बाद सद्दाम हुसैन को पाँच नवंबर, 2006 को मौत की सज़ा सुना दी गई और दिसंबर में इराक़ की अपील सुनने वाली अदालत ने उनकी अपील ख़ारिज कर दी. &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2645934286912353700-5581804735715143935?l=saddamhussainabd.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://saddamhussainabd.blogspot.com/feeds/5581804735715143935/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2645934286912353700&amp;postID=5581804735715143935' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2645934286912353700/posts/default/5581804735715143935'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2645934286912353700/posts/default/5581804735715143935'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://saddamhussainabd.blogspot.com/2008/10/blog-post.html' title='सद्दाम हुसैन'/><author><name>Arvind Gaurav</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/-7LZ1bBHj7P4/Tkvw9uNzsoI/AAAAAAAAAsc/Wa-8Z9dlAaA/s220/Arvind%2Bkumar%2BGaurav.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_S-gIasDIFWo/SPHaj37-8dI/AAAAAAAAAD8/BwDjJm_VtgU/s72-c/390px-Saddam_Hussein_at_trial%252C_July_2004.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry></feed>
